आध्यात्मिक विचार - 01-05-2013


मनुष्य जीवन का लक्ष्य भक्ति-पथ की प्राप्ति।

व्यक्ति को भावनाओं के अधीन न होकर भावनाओं को अपने आधीन रखने का प्रयत्न करना चाहिये।

जो व्यक्ति अपनी भावनाओं को अपने वश में रखकर कर्तव्य-कर्म करता है, केवल वही व्यक्ति भक्ति पथ की ओर अग्रसर हो पाता है। 

आध्यात्मिक विचार - 20-04-2013


विशुद्ध प्रेम से ही परमात्मा की प्राप्ति संभव।

विशुद्ध प्रेम न तो बढ़ता है और न ही घटता है, जो प्रेम बढ़ता है वह "राग" होता है और जो प्रेम घटता है वह "द्वेष" होता है। 

जिस व्यक्ति का न तो किसी वस्तु से "राग" होता है और न ही किसी वस्तु से "द्वेष" ही करता है, ऎसा सम-भाव में स्थित व्यक्ति ही परमात्मा को प्राप्त होता है।