आध्यात्मिक विचार - 28-02-2011

कोई भी व्यक्ति न तो खाली हाथ इस संसार में आता है और न ही खाली हाथ इस संसार से जाता है।

जन्म और मृत्यु संस्कारों पर आधारित होती है और संस्कारों की उत्पत्ति कर्म से होती है, और कर्म के द्वारा ही संस्कारों से मुक्त हुआ जा सकता है, संस्कारों का उत्पन्न न होना ही मुक्ति है।

मनुष्य पुराने संस्कारों को साथ लेकर संसार में आता है और नये संस्कारों को साथ लेकर संसार से चला जाता है।

आध्यात्मिक विचार - 27-02-2011

भगवान समुद्र के समान हैं तो संत पुरुष मेघ के समान होते हैं, भगवान चंदन के वृक्ष के समान हैं तो संत पुरुष पवन के समान होते हैं।

सभी साधनों का फल भगवान की भक्ति ही है, उसे संत पुरुषों के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।

जो व्यक्ति धैर्य और विश्वास के साथ निरन्तर संत पुरुषों की संगति करता है, उसे एक दिन भगवान की भक्ति की प्राप्ति हो ही जाती है।