आज का विचार


जब तक व्यक्ति सम्पूर्ण रूप से दृष्टा-भाव में स्थित नहीं हो जाता है, तब तक व्यक्ति अहंकार से ग्रसित रहता ही हैं। जो व्यक्ति दृष्टा भाव में स्थित हो जाता है, वह न तो किसी की निन्दा करता है और न ही किसी की तारीफ़ करता है, केवल वही यथार्थ रूप से जगत को देख पाता है।

आज का विचार


जब तक व्यक्ति मन, बुद्धि से भगवान को प्राप्त करना चाहता है तब तक भगवान को प्राप्त करना असंभव है, जब व्यक्ति बुद्धि के द्वारा मन को भगवान को हर क्षण समर्पित करता जाता है तब उस व्यक्ति को एक दिन भगवान स्वयं प्राप्त हो जाते हैं।